प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ बालाचार्य योगीन्द्रसागरजी महाराज सा

प्रज्ञा  पुरुषोत्तम श्री १०८ बालाचार्य योगीन्द्रसागरजी महाराज सा

शुक्रवार, 20 मई 2016

मुनि श्री प्रणाम सागर जी अभी उज्जैन में विराज मान है 

14 june ko sheetal thirth ratlam me sabhi padhare


मंगलवार, 10 मई 2016

14 june aacharya shri yogendra sagar g mandir lokarpan

आचार्य श्री योगेंद्र  सागर जी के मन्दिर  का  लोकार्पण  एंड स्मृति ग्रंथ  का विमोचन दिनांक 14 जून  को शीतल तीर्थ पर होगा  आप सभी  सादर आमंत्रित  है
                                             
                                       डॉ  सवीता  जैन
                                       9425355741 didisavita@gmail.com


14 June 2016 Aacharya Shree Yogendra sagar g ke mandir ka lokarpan & Smrti granth ka vimochan hoga aap sabhi sapriwar padhare 

                                              Dr Savita jain
                                               9425355741
                                               9826093618

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

तपस्र्वी को पारणा करवाया



रतलाम,
आचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी म.सा. के षिष्य वृंद चातुर्मास के दौरान ष्षीतलतीर्थ पर तपस्या एवं साधना कर रहे है।
मुनी युक्तिसागर जी ने सोलह कारण के उपवास किए। 105 आर्यिका सुग्रीवमति माताजी ने चैसठ ऋद्धि के उपवास किए। अन्न जल के दो-माह-चार दिन के त्याग मय उपवास अपने आप में विषिष्ठ रहे।उक्त तपस्या को आचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी की प्रेरणा का चमत्कार समझा गया। आर्यिका सुग्रीवमति माताजी की चैसठ ऋद्धि के चैसठ उपवास की इस दौरान दिनचर्या सामान्य रही जो सभी के लिए आष्चर्यकारी थी।जैन महिला मंडल तथा जैन समाज जन ने प्रातः 7 बजे से चैसठ ऋद्धि विधान मण्डल पूजन हुई। प्रातः 10ः30 बजे माताजी का पारणा कराया गया।
आर्यिका सुयुक्ति सेनामति माताजी द्वारा एकान्तर वृत धारण किया गया था।
समस्त तपस्वी साधकों का पारना कराया गया जिसमें मध्यप्रदेष एवं राजस्थान के अनेक स्थानों से समाज बंधु उपस्थित हुए। पारणा कार्यक्रम के अन्र्तगत चैसठ ऋद्धि विधानकर्ता पं. विजय कुमार गाँधी मंदसौर तथा पं. नितिन कुमार षास्त्री भीमपुर ने सम्पन्न कराया।
पुजन का लाभ अरूण कुमार सुमेरपुर तथा गगन बड़जात्या उदयपुर ने किया। चैसठ दिवसीय कठिन तपष्चर्या के पष्चात पाद प्रक्षालन पुखराज सेठी जावरा ने किया। षास्त्र भेंट मांगीलाल कैलाषचंद जी सैलाना ने किया।नई पिच्छिका भेंट पदम महावीर गाँधी ने किया। प्रथम आहार विजय कुमार बाबूलाल ओरा जावरा ने करवाया।आरती का लाभ विजय कुमार गाँधी मंदसौर ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे। डाॅ. सविता जैन ने बताया कि हम सभी कठोर तप  उपवास कर सके यही भावना के साथ जैन धर्म में तपस्या, साधु संतो से आषिर्वाद प्राप्त कर हम भी ऐसी भावना कर सके
पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी, विष्णु त्रिपाठी, दिनेष पोरवाल, केदार अग्रवाल प्रकाष चंद बिलाला, लखनलाल गोधा, अनिल पापरीवाल तथा दिगम्बर जैन समाज जन नये माताजी से आषिर्वाद लिया । कार्यक्रम के पष्चात स्वामी वात्सल्य का आयोजन हुआ जिसमे बड़नगर जावरा बासवाडा, सैलाना, उज्जैन एवं अन्य गुरू भक्तगण ने भाग लिया जानकारी प्रवक्ता अषोक गंगवाल ने दी। सादर प्रकाषनार्थ               प्रवक्ता
(अषोक गंगवाल)



सोमवार, 16 सितंबर 2013

आ.सुग्रीव  मति माता जी  के पारना की पत्रिका 

गुरुवार, 8 अगस्त 2013




शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

53 वां जन्म जयंती महोत्सव

चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य गुरुदेव श्री 108 योगीन्द्र सागर जी म सा का 53 वां  जन्म जयंती महोत्सव शीतल तीर्थ पर मनाया जाएगा।
रतलाम बांसवाडा रोड पर स्थित शीतल तीर्थ पर इस महोत्सव के लिए समस्त धर्मालुजनो को आमंत्रित किया गया है। समारोह की शुरुआत प्रातः 7 बजे श्रीजी के पंचामृत अभिषेक व् पूजन से होगी। प्रातः 8.30 बज प पू आचार्य श्री योगीन्द्र सागरजी   की प्रतिमा का अभिषेक किया जाएगा उक्त जानकारी प्रदान करते हुए शीतल तीर्थ की अधिष्ठात्री डॉ सविता जैन ने बताया की सवेरे 10 बजे साधुओं के आहार एवं साधर्मियों के भोजन पश्चात दोपहर 1 बजे से विनयांजलि सभा एवं भजन का आयोजन होगा।  

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

105 आर्यिका यशोधरमति जी माताजी का समाधीमरण

आचार्य योगीन्द्र सागर जी की शिष्या 105 आर्यिका यशोधरमति जी माताजी ने उज्जैन जिले के बड़नगर में 12 दिसंबर को रात 12 बजकर 12 मिनिट पर चारो प्रकार के आहार त्याग कर समता पूर्वक समाधिमरण किया।
आर्यिका यशोधर मति माताजी का डोल 13 दिसंबर को प्रातः 9 बजे निकला गया। अंतिम संस्कार के पूर्व सम्पूर्ण बडनगर शहर में बैंड बजे के साथ नवकार मंत्रो की धुन पर निकाली गयी डोल यात्रा में इंदौर , रतलाम, बाँसवाड़ा, उज्जैन , सागवाड़ा आदि शहरो  के समाजजनो ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपनी श्रद्धांजलि दी। उपरोक्त जानकारी शीतलधाम प्रवक्ता अशोक गंगवाल ने प्रदान करते हुए बताया की आर्यिका माताजी का बडनगर के जैन चैत्यालय में धार्मिक विधान पूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।

मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

नव दिवसीय महाअर्चना एवं विश्वशांति महायज्ञ

 शीतलधाम पर दसलक्षण पर्व के अंतर्गत नव दिवसीय महाअर्चना एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन 16 अक्तूबर से 24 अक्तूबर तक किया जा रहा है

रविवार, 30 सितंबर 2012

पारणा कार्यक्रम आयोजित

शीतल धाम पर  आर्यिका शुभसेना  माताजी  के 32 निर्जल उपवास का पारणा कार्यक्रम 01 अक्टूबर 2012 को आयोजित हुआ जिसमे  आहार देने का सौभाग्य तेजकरण जी मालविया , खान्दू कालोनी बांसवाड़ा ने प्राप्त किया . पिच्छि प्रदान करने का लाभ अशोक कुमार जी गोधा बडनगर ने प्राप्त किया 

शनिवार, 24 मार्च 2012

पट्टाचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी को विनयांजलि

                पट्टाचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी के अस्थि कलश को आज शीतल तीर्थ की धरा पर समारोह पूर्वक लाया जाकर विनयांजलि सभा का आयोजन संपन्न हुआ. ग्राम डेलनपुर एवं धामनोद के ग्रामीण जनों ने बड़ी संख्या में यात्रा को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि व्यक्त की .

ग्राम डेलनपुर से पद यात्रा की आगवानी आचार्य संघ के मुनि एवं आर्यिकाओं ने की

                संत सदा अपनी शिक्षा , दिए गए संस्कारों , कहे गए वचनों , और तपश्चर्या के लिए अमर रहते है . इस बात का अहसास यहाँ महसूस किया गया .

                 श्रमण परम्परा के गौरव रहे अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ योगीन्द्र सागर जी म सा  को विभिन्न शहरों से पधारे गुरु भक्तो एवं समाज जनों ने अपनी विनयांजलि पुष्प चढ़ा कर दी .

                  सर्व श्री हिम्मत कोठारी ( पूर्व गृह मंत्री) , विष्णु त्रिपाठी ( आर डी ए अध्यक्ष ), दिनेश पोरवाल ( निगम अध्यक्ष ), भरत शर्मा (पप्पू टंच ) परिवार , खैरातीलाल पंजाबी परिवार , अशोक गंगवाल परिवार , राजेश घोटीकर, आशीष सोनी ,  दिनेश चौहान , सर्वोदयी सेवा संघ के सदस्य एवं रतलाम शहर एवं ग्रामीण जनों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की.

                    डॉ संजीव सरन बनारस ने आचार्य श्री के चरणबद्ध जीवन का बखान करते हुए बताया की ब्राह्मण परिवार के  लश्कर निवासी श्री फौदल प्रसाद शर्मा के पुत्र रमेश शर्मा ने दिगंबर जैन दीक्षा आचार्य श्री सन्मति सागर जी से ग्रहण की थी . मुनि/ उपाध्याय/ बालाचार्य  के बाद पिचले वर्ष १६ जनवरी को वे अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश घोषित किए गए थे.


विनयांजलि सभा का संचालन डॉ अनुपम जैन इंदौर ने किया .  

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

शीतल तीर्थ रतलाम
प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ दिगंबर जैनाचार्य योगीन्द्र सागर जी म सा का ५२ वा भव्य अमृत महोत्सव समारोहपूर्वक सागवाडा के योगीन्द्रगिरी अतिशय क्षेत्र पर मनाया जा रहा है. आयोजन श्री १०५ श्री पञ्च महाजनान दशा हुमड एवं समस्त जैन समाज सागवाडा द्वारा किया जा रहा है . आयोजन की जानकारी देते हुए आयोजन समिति के श्री दिलीप कुमार नोगमिया , श्री गुलाबचंद शाह संरक्षक दशा हुमड समाज , एवं श्री दिनेश खोड़निया अध्यक्ष योगीन्द्र गिरी अतिशय क्षेत्र ने बताया कि प पू मुनि कुंजर श्री १०८ आचार्य आदिसागर जी म सा अंकलीकर के तृतीय पट्टाधीश प पू महातपो मार्तंड , सिद्धांत चक्रवर्ती श्री १०८ आचार्य  सन्मति सागर जी म सा के पट्टाधीश प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ दिगंबर जैनाचार्य योगीन्द्र सागर जी म सा की जन्म जयंती के उपलक्ष में दिनांक १६ एवं १७ फरवरी को धार्मिक विधान सह पाद प्रक्षालन का आयोजन सागवाड के योगीन्द्र गिरी तीर्थ पर किया जा रहा है जिसमे नव निर्मित भवनों का वास्तु मंडल एवं नवग्रह विधान पश्चात लोकार्पण किया जाएगा.
वागड़ प्रान्त की धर्म धरा पर आयोजित इस अमृत महोत्सव के अवसर के अतिथिगण निम्न रहेंगे
मुख्य अतिथि श्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय पंचायत राज्य मंत्री राजस्थान सरकार ,
अध्यक्ष सर्व श्री ताराचंद जी भगोरा सांसद बांसवाडा , श्री दयाराम जी परमार उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजस्थान , एवं रघुवीर सिंह मीणा सांसद उदयपुर होंगे
जबकि कार्यक्रम का विशिष्ट आथिथ्य सर्वश्री सुरेन्द्र जी बामणिया (विधायक सागवाडा ) कनकमल जी कटारा (पूर्व मंत्री राजस्थान ), सत्यनारायण सोनी (न पा अध्यक्ष सागवाडा), मोहनलालजी पिंडारमिया (अध्यक्ष साधे बारह मंदिर चौखला ) सुरेश सिंघवी बांसवाडा, के के गुप्ता ( अध्यक्ष चेंबर ऑफ़ कोमर्स ), हिम्मत कोठारी ( पूर्व मंत्री म प्र), विष्णु त्रिपाठी ( अध्यक्ष रतलाम विकास प्राधिकरण ) दिनेश पोरवाल (अध्यक्ष नगर निगम रतलाम ) द्वारा स्वीकार किया गया है .
कार्यक्रम में पधारने वाले विशिष्ट विद्वतजन जिनका सम्मान किया जाएगा निम्न रहेंगे
डॉ अनुपम जैन इंदौर, डॉ देवकुमार जैन रायपुर, डॉ संजीव सर्राफ बनारस, डॉ आनंद जैन दिल्ली हैं.
उक्त जानकारी देते हुए शीतल तीर्थ प्रवक्ता अशोक गंगवाल ने बताया कि आयोजित धार्मिक आयोजनों , विनयांजलि सभा, अतिथि सम्मान एवं भवन लोकार्पण समारोह योगीन्द्र गिरी निर्देशिका डॉ सविता जैन के निर्देशन में आयोजित किए गए हैं. समस्त भक्त मंडल एवं जैन समाज के बंधू इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए है.
अशोक गंगवाल
प्रवक्ता शीतल तीर्थ
रतलाम   

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

mahatapo martand aacharya sanmati sagarji ka pratham samadhi diwas par tridiwasiya ayojan sri digamberjain shitaltirth ratlam par chaturth pattachary yogindrasagarji ke sanidhya me.

दिनांक २२-१२-११ से दिनांक २४-१२-११ तक श्री दिगम्बर जैन शीतल्तीर्थ   रतलाम म० प्र० में आचार्य सन्मति सागरजी के चतुर्थ पत्ताचार्य  श्री योगीन्द्रसगार्जी के सानिध्य में मनाया गया. दी  २२-१२-११ को प० पू० वात्सल्य रत्नाकर आचार्य विमल सागरजी  का १७व समाधीदिवस पर प्रातः आचार्यश्री की प्रतिमा का पूजन अभिषेक किया गया. दोपहर की सभा को संबोधित करते हूए चतुर्थ पत्ताचार्य   श्री योगीन्द्र सागरजी ने कहा की वर्तमान में आचार्य विमल सागरजी जैसा निमित्त ज्ञानी हो नहीं सकता है, क्योंकि उनकीभविष्यवाणी  का में स्वयं  उदहारण हूँ . आचार्य विमल सागर जी महाराज  ने मेरी २७ दिन की आयो में ही घोषणा कर दी थी की ये बालक घर में नहीं रहेगा संत बनेगा, ब्राह्मन कुल में जन्म होने से किसी को कल्पना भी नहीं थी की में गौतम गणधर की परम्परा का अनुसरण  करूगा. उन्हों ने  अपने जीवन कई लोगो का उपकार किया एवं लोगो को जैन धर्मं में श्रधान मजबूत  किया . में ऐसे आचार्यशी  विमल सागरजी  के चरणों में वंदन कर स्वयं को धन्य समझाता हूँ . दि .२३-१२-११ को रिषिमंडल विधान किया गया जिसका लाभ  श्री राजेश मेहता खान्दुकोलोनी बांसवाडा  राज. परिवार ने लिया .दि .२४-१२-११ को प्रातः आचार्य श्री सन्मति सागरजी की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया .१०८ कलशो की दुग्ध धरा की गयी. दोपहर की सभा में आचार्य सन्मति सागरजी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन श्री विजय ओरा जावरा,श्री तेजकरण मालवीय,श्री कमलजी हथियावत. खान्दू कालोनी बांसवाडा आदि ने किया. पुष्पार्चन श्री अभय जैन  उज्जैन,श्री दीपक गोधा ने किया. सभा का मंगलाचरण सुप्रसिद्ध कवि श्री उत्सव जैन नौगामा राज. ने किया . सभा को श्री तनसुख राय गडिया  रतलाम,श्री अनिल पापदीवाल  रतलाम,मनोज जैन भिंड, अभय जैन एवं मुनि यद्वेंद्रनाथ मुनि यतीन्द्र नाथ आदि ने संबोधित  किया. अंत में चतुर्थ पत्ताचार्य योगीन्द्र सागर जी ने संबोधित करते हुए  समाधी के अर्थ को बताते हुए कहा  की  सम#धी का अर्थ है की जिसकी बुद्धि सम है . जो सभी परीस्थितियो में सम रहे . गृहस्थ को शरीर छोड़ता है जबकि साधू शरीर  को छोड़ता है. जब साधू को लगता है की शरीर अब धर्म साधन करने योग्य नहीं रह गया है. तो  वह शरीर का परित्याग करने को तैयार हो जाता है . मेरे गुरुदेव आचार्य श्री सन्मति सागरजी महाराज ने १२ वर्ष की समाधी ले ली थी किन्तु १२ वर्ष पुरे होने के १२ दिन पहले  ही शरीर को छोड़ दिया . वैसे तो संत का समाधी मरण  महोत्सव का कारन होता है. किन्तु हमारे गुरु का शरीर परित्याग करना हमारे लिए अपूर्णीय क्षति है . जब तक ऊपर मस्तक पर गुरु का आशीर्वाद होता है एक निश्चिंतता  रहती है.  हमे जिस तरह गुरु ने मोक्ष मार्ग का पथिक बने है वैसे ही हमे कभी किसी भी मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी तो गुरुदेव से ले लेंगे. किन्तो अब तो जिम्मेदारी  भी बढ  गई है. में उस महान तपस्वी आत्मा को आचार्य अवस्था में ध्यान में रख कर सिद्ध भक्ति, श्रुत भक्ति , समाधी भक्ति सहित नमन करता हूँ.में आचार्य श्री का ऋणी हूँ की उन्होंने मुझे जैनेश्वरी दीक्षा देकर मुझे इस मार्ग पर लगाया है  .
   

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

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गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

जीवन में निश्चय एवं व्यवहार दोनों जरुरी है .

जिस तरह कोई भी गाड़ी एक पहिये से नहीं चल सकती है, उसे चलने के लिए दोनों पहिये कि आवश्यकता होती है , ठीक उसी तरह धर्म रूपी गाड़ी भी निश्चय एवं व्यवहार दोनों मार्गो कि आवश्यकता होती है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए दोनों की आवश्यकता होती है। केवल निश्चय या केवल व्यवहार से परम सत्ता को प्राप्त नहीं कर सकते है । अतएव हमे सम्यक रूप से दोनों मार्ग अपनाने चाहिए .जहाँ चाकू की जरुरत है वहा चाकू एवं जहाँ सुई की जरुरत वहां सुई का प्रयोग ही करना चाहिए । गृहस्थ धर्म का पालन करते हुऐ। समय अनुसार प्राथमिकता तय करना चाहिए.

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

मन को मारो मत मन को मोड़ो

दि।। ४-११-११ को चतुर्थ पटटाचार्य श्री योगिन्द्रसगार्जी महाराज ने शीतलतीथॅ पर आयोजित धर्मसभा में कहा कि मानव को अपने मन को मारने कि जगह मन को मोड़ने का प्रयास करना चाहिए क्योकि हम जिस चीज से दूर भागना चाहते है वह चीज उतनी ही हमारे मन में अपना घर बनाती जाती है। हमें मन को दुसरे काम में लगाकर मन की दिशा को बदलने का प्रयास करना चाहिए। यदिहम परछाई को पकड़ने की कोशिश करतेहै तो वह आगे चलती जाती है, किन्तू यदि हम पीठ कर लेते है तो वही परछाई हमारे पीछे दौड़ने लगती है। वेसे ही मन कि आदत है , आप जितना इसके अनुसार चलेगे वह भटकाएगा यदि किसी और काम में लगा दिया तो यह उस काम लग जायेगा । इसलिए इसे किसी सकारात्मक काम मे लगा देना चाहिए । यदि मन ही रहेगा तो भगवान का भजन कैसे करेंगे । मन को सुमन बनाये कुमां नहीं। कार्यक्रम के प्रारंभ में पुखराज सेठी जावरा ने मंगलाचरण कर गुरु वंदना की। मनोज जैन ने स्वागत भाषण दिया । कार्यक्रम का सशक्त सञ्चालन डॉ सविता जैन ने किया।