रतलाम
बालाचार्य श्री योगीन्द्र सागरजी महाराज जी द्वारा नव दिवसीय विधान मंडल का आयोजन यहाँ साथ घर के गोथ के नोहरे में आयोजित कि गई है इसके अतर्गत प्रतिदिन विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को स्नेह भोज हेतु आमंत्रित किया जा रहा है ।
गुरूवार कि शाम जिला प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कीजिलाधीश राजेन्द्र शर्मा , एस डी एम् श्री सलूजा , पंचायत के उप संचालक के एन जोशी आदि इनमे प्रमुख थे। प्रातः ईसाई समुदाय के धर्मालुओं ने फादर यह नगरमें पहला अवसर होगा जबकि भोज किया ।
शुक्रवार को महामृत्युंजय विधान पूजन किया जाकर स्नेह भोज में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ नेतागण आमंत्रीत किये गए सर्वश्री हिम्मतजी कोठारी , महापौर शेलेन्द्र डागा, निगम अध्यक्ष दिनेशजी पोरवाल , पार्षद सीमा टाक, पवन सोमानी , भा ज प् जिला महामंत्री बजरंग जी पुरोहित, विष्णु त्रिपाठी , मनोज यादव, वीरेंद्र वाफगाँवकर, लक्ष्मी नारायण धारवा एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने आयोजन में भाग लिया ।
शनिवार को धार्मिक कड़ी में श्री शान्ति विधान पूजन किया जाएगा तथा कांग्रेस के नेता एवं पदाधिकारियों को स्नेह भोज कराया जाएगा ।
उक्त जानकारी शीतल तीर्थ प्रबंधक डॉ सविता जैन ने देते हुए नगर के समस्त धर्मालुओं से आग्रह किया है की दिनांक १७ अक्तूबर रविवार को रतलाम में पहली बार निकलनेवाली विशाल गजरथ शोभायात्रा में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेवें ।
प पू मुनिकुंजर आचार्य १०८ श्री आदिसागरजी म सा (अंकलीकर) परंपरा के तृतीय पट्टाधीश प पू महातपोमार्तंड आचार्य १०८ श्री सन्मतिसागरजी म सा के पट्टाधीश प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम सिद्धांत रत्नाकार १०८ आचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी म सा की प्रेरणा से दिगंबर जैनाचार्य शीतलकीर्ति महाराज सा के नाम को समर्पित कर "शीतलतीर्थ" रतलाम के बाँसवाड़ा रोड पर निर्माण गया है । दिगंबर जैन शीतलतीर्थ अधिष्ठात्री डॉ सविता जैन ०९४२५३५५७४१
प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ बालाचार्य योगीन्द्रसागरजी महाराज सा
शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010
सोमवार, 11 अक्टूबर 2010
मंगलवार, 28 सितंबर 2010
सिन्धी समाज ने आयोजित किये प्रवचन
रविवार, 19 सितंबर 2010
चौके को भोजन शाला बनावे किचन नहीं
शुद्ध चौके को भोजन शाला कहते हैं। भोजनशाला यदि शुद्ध हो तो सभी परिजन प्रसन्न रहते हैं मगर यदि चौका अशुद्ध हो तो जीवन में कीच-कीच होती है। इसलिए घर के चौके को भोजनशाला बनाए, किचन नहीं। चौके में चार तरह कि शुद्धता चाहिए मन (अन्तरंग) शुद्धि, काया शुद्धि, भोजन शुद्धि, स्थान शुद्धि। उक्त बात बालाचार्य १०८ श्री योगीन्द्र सागरजी महाराज ने गुरु योगी भक्त मंडल द्वारा धानमंडी स्थित रानी जी के मंदिर प्रांगन पर आयोजित प्रवचन कार्क्रम में कही। जीवन में चार का महत्त्व उन्होंने चार तरह के दान, चार तरह के त्याग के माध्यम से समझाया। उन्होंने त्याग कि महता भी बताई और कहा कि त्याग का फल हमेश अच्छा ही मिलता है। अपरिग्रह, देश धर्म, तीर्थ रक्षा और परोपकार को दान कि श्रेणी में रखा और कहा कि इन सभी का नियम पूर्वक पालन करना चाहिए।
प्रारंभ में दीप प्रज्वलन नगर निगम अध्यक्ष दिनेश पोरवाल एवं महेश शर्मा ने किया । श्रीफल भेंट कर विनयांजलि खेमराज व्यास, कान्हा गुरु, चन्द्र प्रकाश व्यास , पुरुषोत्तम चोरसिया, तुलसी राम व्यास, सोहन उपाध्याय, मुकेश बाफना, किशोर उज्जैनवाला, संदीप पोहावाला, बालूजीपंडया, अमृत व्यास, राजू बोहरा, प्रहलाद बन्दवार आदि ने किया। प्रभावना का पून्यार्जन देवीलाल जोशी ने लिया जबकि संचालन विष्णु त्रिपाठी ने किया ।
उक्त समाचार गुरु योगी भक्त मंडल धानमण्डी ने दिया ।
प्रारंभ में दीप प्रज्वलन नगर निगम अध्यक्ष दिनेश पोरवाल एवं महेश शर्मा ने किया । श्रीफल भेंट कर विनयांजलि खेमराज व्यास, कान्हा गुरु, चन्द्र प्रकाश व्यास , पुरुषोत्तम चोरसिया, तुलसी राम व्यास, सोहन उपाध्याय, मुकेश बाफना, किशोर उज्जैनवाला, संदीप पोहावाला, बालूजीपंडया, अमृत व्यास, राजू बोहरा, प्रहलाद बन्दवार आदि ने किया। प्रभावना का पून्यार्जन देवीलाल जोशी ने लिया जबकि संचालन विष्णु त्रिपाठी ने किया ।
उक्त समाचार गुरु योगी भक्त मंडल धानमण्डी ने दिया ।
रविवार, 12 सितंबर 2010
अपना संशोधन करें ....... बालाचार्य जी
जटाजूट माला तिलक
हुए शीश के भार ।
भेष बदल क्या हुआ
अपना चित्त सुधार ।।
हुए शीश के भार ।
भेष बदल क्या हुआ
अपना चित्त सुधार ।।
भेस बदलने में नहीं , कौड़ी लगे छलांग ।
भेस बदलना सरल है , तू तो बदल विचार । ।
उक्त पंक्तिया बालाचार्य जी ने शीतल धाम में प्रति रविवार आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने जीवन को सहज और सरल बनाने पर जोर दिया । व्यक्ति को सन्मार्ग पर लाने के लिए गुरुओं के द्वारा किये गए प्रयासों को भी विस्तार से समझाया ।
प्रारंभ में विनयांजलि विजय जी ओर जावरा, बजरंग जी पुरोहित, राजेश जी घोटीकर, निर्मल जी जैन, पदमजी सहलावत जयंतीलाल जी जैन, डेलनपुर के फूलचंद जी, बजारामजी , कैलाश जी उपाध्याय , मोतीलाल जी पाटीदार , भरतलाल जी पाटीदार , भेरुलाल जी पाटीदार , रामलाल जी , बाबूलाल जी आदि ने श्रीफल भेंट कर कि।
अभेद मति माताजी ने सभा को सम्बोद्झित कर कहा - नियम कि महत्ता जीवन को सफल बनाती है इन्हें अंतिम साँसों तक पालन करें । अहिंसा के बिना कोई धर्म नहीं है इसलिए हिंसा त्यागें । प्रभावना का सौभाग्य धामनोद के श्री देवीलाल ने लिया ।
कर्तव्य ही धर्म है.
बाबा रामदेव को लोग बाबा रामापीर के नाम से भी जानते हैं । साईबाबा और अनेको विभूतियाँ हुई जिन्होंने भाई चारे का सन्देश पहुंचाया है । अवतारों का पूर्ण ब्योरा मिल जाता है मगर इन संतों का ब्यौरा मिलना नामुमकिन है । सामाजिक सौहार्द्रता के कई प्रयास संतों ने किए है इसीलिए इनके स्थानों पर सभी धर्म के लोग आते जाते है ।
बाबा रामदेव संस्कारों को प्रेरित कर गए है इनका पालन करें । आज रामापीर कि जयंती के साथ आचार्य शांति सागर जी का देवलोक प्रयाण भी हुआ है दोनों महान संतों का स्मरण कर उनके बताए आचरण अपने जीवन में उतारने का प्रयास हो।
कार्यक्रम का संचालन रामेश्वरजी मुंशी ने किया । कार्यक्रम उपरान्त भंडारे का आयोजन मंदिर समिति ने किया ।
"आज देश को दुश्मन से नहीं गद्दारों से ख़तरा है ,
खजाने को चोरों से नहीं पहरेदारों से ख़तरा है।"
उक्त बात बलाचारी श्री १०८ योगीन्द्र सागर जी महाराज ने बाबा रामदेव कि जयंती के अवसर पर आयोजित सभा में कही । उन्होंने सागोद स्थित बाबा रामदेव के मंदिर में अपने प्रवचन देते हुए कहा कि असुर, अधम और अभिमानी जब कभी पैदा होते हैं संतों या महापुरुषों को अवतरित होना पड़ता है । आज लोग अभिमान कि जकड में है । ये अभिमान ८ प्रकार के हैं । (ज्ञान /पूजा /कुल / जाति/ बल/रिद्धि/तप एवं वपु )। ज्ञान का बोध , पूजनीय हो जाने पर , जाति और कुल में जन्म , शारीरिक और जन बन , धन बल , तप कर लेने पर और रूप-सौन्दर्य का घमंड ।बाबा रामदेव संस्कारों को प्रेरित कर गए है इनका पालन करें । आज रामापीर कि जयंती के साथ आचार्य शांति सागर जी का देवलोक प्रयाण भी हुआ है दोनों महान संतों का स्मरण कर उनके बताए आचरण अपने जीवन में उतारने का प्रयास हो।
कार्यक्रम का संचालन रामेश्वरजी मुंशी ने किया । कार्यक्रम उपरान्त भंडारे का आयोजन मंदिर समिति ने किया ।
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