शीतलधाम पर दसलक्षण पर्व के अंतर्गत नव दिवसीय महाअर्चना एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन 16 अक्तूबर से 24 अक्तूबर तक किया जा रहा है
प पू मुनिकुंजर आचार्य १०८ श्री आदिसागरजी म सा (अंकलीकर) परंपरा के तृतीय पट्टाधीश प पू महातपोमार्तंड आचार्य १०८ श्री सन्मतिसागरजी म सा के पट्टाधीश प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम सिद्धांत रत्नाकार १०८ आचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी म सा की प्रेरणा से दिगंबर जैनाचार्य शीतलकीर्ति महाराज सा के नाम को समर्पित कर "शीतलतीर्थ" रतलाम के बाँसवाड़ा रोड पर निर्माण गया है । दिगंबर जैन शीतलतीर्थ अधिष्ठात्री डॉ सविता जैन ०९४२५३५५७४१
प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ बालाचार्य योगीन्द्रसागरजी महाराज सा
बुधवार, 17 अक्टूबर 2012
रविवार, 30 सितंबर 2012
शनिवार, 24 मार्च 2012
पट्टाचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी को विनयांजलि
पट्टाचार्य श्री योगीन्द्रसागर जी के अस्थि कलश को आज शीतल तीर्थ की धरा पर समारोह पूर्वक लाया जाकर विनयांजलि सभा का आयोजन संपन्न हुआ. ग्राम डेलनपुर एवं धामनोद के ग्रामीण जनों ने बड़ी संख्या में यात्रा को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि व्यक्त की .
ग्राम डेलनपुर से पद यात्रा की आगवानी आचार्य संघ के मुनि एवं आर्यिकाओं ने की
संत सदा अपनी शिक्षा , दिए गए संस्कारों , कहे गए वचनों , और तपश्चर्या के लिए अमर रहते है . इस बात का अहसास यहाँ महसूस किया गया .
श्रमण परम्परा के गौरव रहे अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ योगीन्द्र सागर जी म सा को विभिन्न शहरों से पधारे गुरु भक्तो एवं समाज जनों ने अपनी विनयांजलि पुष्प चढ़ा कर दी .
सर्व श्री हिम्मत कोठारी ( पूर्व गृह मंत्री) , विष्णु त्रिपाठी ( आर डी ए अध्यक्ष ), दिनेश पोरवाल ( निगम अध्यक्ष ), भरत शर्मा (पप्पू टंच ) परिवार , खैरातीलाल पंजाबी परिवार , अशोक गंगवाल परिवार , राजेश घोटीकर, आशीष सोनी , दिनेश चौहान , सर्वोदयी सेवा संघ के सदस्य एवं रतलाम शहर एवं ग्रामीण जनों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की.
डॉ संजीव सरन बनारस ने आचार्य श्री के चरणबद्ध जीवन का बखान करते हुए बताया की ब्राह्मण परिवार के लश्कर निवासी श्री फौदल प्रसाद शर्मा के पुत्र रमेश शर्मा ने दिगंबर जैन दीक्षा आचार्य श्री सन्मति सागर जी से ग्रहण की थी . मुनि/ उपाध्याय/ बालाचार्य के बाद पिचले वर्ष १६ जनवरी को वे अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश घोषित किए गए थे.
विनयांजलि सभा का संचालन डॉ अनुपम जैन इंदौर ने किया .
ग्राम डेलनपुर से पद यात्रा की आगवानी आचार्य संघ के मुनि एवं आर्यिकाओं ने की
संत सदा अपनी शिक्षा , दिए गए संस्कारों , कहे गए वचनों , और तपश्चर्या के लिए अमर रहते है . इस बात का अहसास यहाँ महसूस किया गया .
श्रमण परम्परा के गौरव रहे अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ योगीन्द्र सागर जी म सा को विभिन्न शहरों से पधारे गुरु भक्तो एवं समाज जनों ने अपनी विनयांजलि पुष्प चढ़ा कर दी .
सर्व श्री हिम्मत कोठारी ( पूर्व गृह मंत्री) , विष्णु त्रिपाठी ( आर डी ए अध्यक्ष ), दिनेश पोरवाल ( निगम अध्यक्ष ), भरत शर्मा (पप्पू टंच ) परिवार , खैरातीलाल पंजाबी परिवार , अशोक गंगवाल परिवार , राजेश घोटीकर, आशीष सोनी , दिनेश चौहान , सर्वोदयी सेवा संघ के सदस्य एवं रतलाम शहर एवं ग्रामीण जनों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की.
डॉ संजीव सरन बनारस ने आचार्य श्री के चरणबद्ध जीवन का बखान करते हुए बताया की ब्राह्मण परिवार के लश्कर निवासी श्री फौदल प्रसाद शर्मा के पुत्र रमेश शर्मा ने दिगंबर जैन दीक्षा आचार्य श्री सन्मति सागर जी से ग्रहण की थी . मुनि/ उपाध्याय/ बालाचार्य के बाद पिचले वर्ष १६ जनवरी को वे अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश घोषित किए गए थे.
विनयांजलि सभा का संचालन डॉ अनुपम जैन इंदौर ने किया .
बुधवार, 15 फ़रवरी 2012
शीतल तीर्थ रतलाम
प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ दिगंबर जैनाचार्य योगीन्द्र सागर जी म सा का ५२ वा भव्य अमृत महोत्सव समारोहपूर्वक सागवाडा के योगीन्द्रगिरी अतिशय क्षेत्र पर मनाया जा रहा है. आयोजन श्री १०५ श्री पञ्च महाजनान दशा हुमड एवं समस्त जैन समाज सागवाडा द्वारा किया जा रहा है . आयोजन की जानकारी देते हुए आयोजन समिति के श्री दिलीप कुमार नोगमिया , श्री गुलाबचंद शाह संरक्षक दशा हुमड समाज , एवं श्री दिनेश खोड़निया अध्यक्ष योगीन्द्र गिरी अतिशय क्षेत्र ने बताया कि प पू मुनि कुंजर श्री १०८ आचार्य आदिसागर जी म सा अंकलीकर के तृतीय पट्टाधीश प पू महातपो मार्तंड , सिद्धांत चक्रवर्ती श्री १०८ आचार्य सन्मति सागर जी म सा के पट्टाधीश प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ दिगंबर जैनाचार्य योगीन्द्र सागर जी म सा की जन्म जयंती के उपलक्ष में दिनांक १६ एवं १७ फरवरी को धार्मिक विधान सह पाद प्रक्षालन का आयोजन सागवाड के योगीन्द्र गिरी तीर्थ पर किया जा रहा है जिसमे नव निर्मित भवनों का वास्तु मंडल एवं नवग्रह विधान पश्चात लोकार्पण किया जाएगा.
वागड़ प्रान्त की धर्म धरा पर आयोजित इस अमृत महोत्सव के अवसर के अतिथिगण निम्न रहेंगे
मुख्य अतिथि श्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय पंचायत राज्य मंत्री राजस्थान सरकार ,
अध्यक्ष सर्व श्री ताराचंद जी भगोरा सांसद बांसवाडा , श्री दयाराम जी परमार उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजस्थान , एवं रघुवीर सिंह मीणा सांसद उदयपुर होंगे
जबकि कार्यक्रम का विशिष्ट आथिथ्य सर्वश्री सुरेन्द्र जी बामणिया (विधायक सागवाडा ) कनकमल जी कटारा (पूर्व मंत्री राजस्थान ), सत्यनारायण सोनी (न पा अध्यक्ष सागवाडा), मोहनलालजी पिंडारमिया (अध्यक्ष साधे बारह मंदिर चौखला ) सुरेश सिंघवी बांसवाडा, के के गुप्ता ( अध्यक्ष चेंबर ऑफ़ कोमर्स ), हिम्मत कोठारी ( पूर्व मंत्री म प्र), विष्णु त्रिपाठी ( अध्यक्ष रतलाम विकास प्राधिकरण ) दिनेश पोरवाल (अध्यक्ष नगर निगम रतलाम ) द्वारा स्वीकार किया गया है .
कार्यक्रम में पधारने वाले विशिष्ट विद्वतजन जिनका सम्मान किया जाएगा निम्न रहेंगे
डॉ अनुपम जैन इंदौर, डॉ देवकुमार जैन रायपुर, डॉ संजीव सर्राफ बनारस, डॉ आनंद जैन दिल्ली हैं.
उक्त जानकारी देते हुए शीतल तीर्थ प्रवक्ता अशोक गंगवाल ने बताया कि आयोजित धार्मिक आयोजनों , विनयांजलि सभा, अतिथि सम्मान एवं भवन लोकार्पण समारोह योगीन्द्र गिरी निर्देशिका डॉ सविता जैन के निर्देशन में आयोजित किए गए हैं. समस्त भक्त मंडल एवं जैन समाज के बंधू इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए है.
अशोक गंगवाल
प्रवक्ता शीतल तीर्थ
रतलाम
प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ दिगंबर जैनाचार्य योगीन्द्र सागर जी म सा का ५२ वा भव्य अमृत महोत्सव समारोहपूर्वक सागवाडा के योगीन्द्रगिरी अतिशय क्षेत्र पर मनाया जा रहा है. आयोजन श्री १०५ श्री पञ्च महाजनान दशा हुमड एवं समस्त जैन समाज सागवाडा द्वारा किया जा रहा है . आयोजन की जानकारी देते हुए आयोजन समिति के श्री दिलीप कुमार नोगमिया , श्री गुलाबचंद शाह संरक्षक दशा हुमड समाज , एवं श्री दिनेश खोड़निया अध्यक्ष योगीन्द्र गिरी अतिशय क्षेत्र ने बताया कि प पू मुनि कुंजर श्री १०८ आचार्य आदिसागर जी म सा अंकलीकर के तृतीय पट्टाधीश प पू महातपो मार्तंड , सिद्धांत चक्रवर्ती श्री १०८ आचार्य सन्मति सागर जी म सा के पट्टाधीश प पू प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्री १०८ दिगंबर जैनाचार्य योगीन्द्र सागर जी म सा की जन्म जयंती के उपलक्ष में दिनांक १६ एवं १७ फरवरी को धार्मिक विधान सह पाद प्रक्षालन का आयोजन सागवाड के योगीन्द्र गिरी तीर्थ पर किया जा रहा है जिसमे नव निर्मित भवनों का वास्तु मंडल एवं नवग्रह विधान पश्चात लोकार्पण किया जाएगा.
वागड़ प्रान्त की धर्म धरा पर आयोजित इस अमृत महोत्सव के अवसर के अतिथिगण निम्न रहेंगे
मुख्य अतिथि श्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय पंचायत राज्य मंत्री राजस्थान सरकार ,
अध्यक्ष सर्व श्री ताराचंद जी भगोरा सांसद बांसवाडा , श्री दयाराम जी परमार उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजस्थान , एवं रघुवीर सिंह मीणा सांसद उदयपुर होंगे
जबकि कार्यक्रम का विशिष्ट आथिथ्य सर्वश्री सुरेन्द्र जी बामणिया (विधायक सागवाडा ) कनकमल जी कटारा (पूर्व मंत्री राजस्थान ), सत्यनारायण सोनी (न पा अध्यक्ष सागवाडा), मोहनलालजी पिंडारमिया (अध्यक्ष साधे बारह मंदिर चौखला ) सुरेश सिंघवी बांसवाडा, के के गुप्ता ( अध्यक्ष चेंबर ऑफ़ कोमर्स ), हिम्मत कोठारी ( पूर्व मंत्री म प्र), विष्णु त्रिपाठी ( अध्यक्ष रतलाम विकास प्राधिकरण ) दिनेश पोरवाल (अध्यक्ष नगर निगम रतलाम ) द्वारा स्वीकार किया गया है .
कार्यक्रम में पधारने वाले विशिष्ट विद्वतजन जिनका सम्मान किया जाएगा निम्न रहेंगे
डॉ अनुपम जैन इंदौर, डॉ देवकुमार जैन रायपुर, डॉ संजीव सर्राफ बनारस, डॉ आनंद जैन दिल्ली हैं.
उक्त जानकारी देते हुए शीतल तीर्थ प्रवक्ता अशोक गंगवाल ने बताया कि आयोजित धार्मिक आयोजनों , विनयांजलि सभा, अतिथि सम्मान एवं भवन लोकार्पण समारोह योगीन्द्र गिरी निर्देशिका डॉ सविता जैन के निर्देशन में आयोजित किए गए हैं. समस्त भक्त मंडल एवं जैन समाज के बंधू इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए है.
अशोक गंगवाल
प्रवक्ता शीतल तीर्थ
रतलाम
मंगलवार, 27 दिसंबर 2011
mahatapo martand aacharya sanmati sagarji ka pratham samadhi diwas par tridiwasiya ayojan sri digamberjain shitaltirth ratlam par chaturth pattachary yogindrasagarji ke sanidhya me.
दिनांक २२-१२-११ से दिनांक २४-१२-११ तक श्री दिगम्बर जैन शीतल्तीर्थ रतलाम म० प्र० में आचार्य सन्मति सागरजी के चतुर्थ पत्ताचार्य श्री योगीन्द्रसगार्जी के सानिध्य में मनाया गया. दी २२-१२-११ को प० पू० वात्सल्य रत्नाकर आचार्य विमल सागरजी का १७व समाधीदिवस पर प्रातः आचार्यश्री की प्रतिमा का पूजन अभिषेक किया गया. दोपहर की सभा को संबोधित करते हूए चतुर्थ पत्ताचार्य श्री योगीन्द्र सागरजी ने कहा की वर्तमान में आचार्य विमल सागरजी जैसा निमित्त ज्ञानी हो नहीं सकता है, क्योंकि उनकीभविष्यवाणी का में स्वयं उदहारण हूँ . आचार्य विमल सागर जी महाराज ने मेरी २७ दिन की आयो में ही घोषणा कर दी थी की ये बालक घर में नहीं रहेगा संत बनेगा, ब्राह्मन कुल में जन्म होने से किसी को कल्पना भी नहीं थी की में गौतम गणधर की परम्परा का अनुसरण करूगा. उन्हों ने अपने जीवन कई लोगो का उपकार किया एवं लोगो को जैन धर्मं में श्रधान मजबूत किया . में ऐसे आचार्यशी विमल सागरजी के चरणों में वंदन कर स्वयं को धन्य समझाता हूँ . दि .२३-१२-११ को रिषिमंडल विधान किया गया जिसका लाभ श्री राजेश मेहता खान्दुकोलोनी बांसवाडा राज. परिवार ने लिया .दि .२४-१२-११ को प्रातः आचार्य श्री सन्मति सागरजी की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया .१०८ कलशो की दुग्ध धरा की गयी. दोपहर की सभा में आचार्य सन्मति सागरजी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन श्री विजय ओरा जावरा,श्री तेजकरण मालवीय,श्री कमलजी हथियावत. खान्दू कालोनी बांसवाडा आदि ने किया. पुष्पार्चन श्री अभय जैन उज्जैन,श्री दीपक गोधा ने किया. सभा का मंगलाचरण सुप्रसिद्ध कवि श्री उत्सव जैन नौगामा राज. ने किया . सभा को श्री तनसुख राय गडिया रतलाम,श्री अनिल पापदीवाल रतलाम,मनोज जैन भिंड, अभय जैन एवं मुनि यद्वेंद्रनाथ मुनि यतीन्द्र नाथ आदि ने संबोधित किया. अंत में चतुर्थ पत्ताचार्य योगीन्द्र सागर जी ने संबोधित करते हुए समाधी के अर्थ को बताते हुए कहा की सम#धी का अर्थ है की जिसकी बुद्धि सम है . जो सभी परीस्थितियो में सम रहे . गृहस्थ को शरीर छोड़ता है जबकि साधू शरीर को छोड़ता है. जब साधू को लगता है की शरीर अब धर्म साधन करने योग्य नहीं रह गया है. तो वह शरीर का परित्याग करने को तैयार हो जाता है . मेरे गुरुदेव आचार्य श्री सन्मति सागरजी महाराज ने १२ वर्ष की समाधी ले ली थी किन्तु १२ वर्ष पुरे होने के १२ दिन पहले ही शरीर को छोड़ दिया . वैसे तो संत का समाधी मरण महोत्सव का कारन होता है. किन्तु हमारे गुरु का शरीर परित्याग करना हमारे लिए अपूर्णीय क्षति है . जब तक ऊपर मस्तक पर गुरु का आशीर्वाद होता है एक निश्चिंतता रहती है. हमे जिस तरह गुरु ने मोक्ष मार्ग का पथिक बने है वैसे ही हमे कभी किसी भी मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी तो गुरुदेव से ले लेंगे. किन्तो अब तो जिम्मेदारी भी बढ गई है. में उस महान तपस्वी आत्मा को आचार्य अवस्था में ध्यान में रख कर सिद्ध भक्ति, श्रुत भक्ति , समाधी भक्ति सहित नमन करता हूँ.में आचार्य श्री का ऋणी हूँ की उन्होंने मुझे जैनेश्वरी दीक्षा देकर मुझे इस मार्ग पर लगाया है .
शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011
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